Share This Post

सूर्यास्त का रंगमंच

सूर्यास्त का रंगमंच

कभी देखा है तुमने भारत भवन के पीछे का सूर्यास्त!
दिन भर की आपाधापी के अंत के साथ होती है एक नैसर्गिक नाट्य प्रस्तुति की शुरुआत।

जिसकी प्रकाश परिकल्पना है चाँद की,
और संचालन शाम ने संभाला है।

झील में प्रवाहित लहरों ने दिया है जिसका कर्णप्रिय संगीत।

गायन वृंद को अपने मधुर कलरव से सजाया है पक्षियों ने।

नृत्य संरचना पेड़ों की है, और संचालन किया है हवाओं ने।

मंच सज्जा चमकीले सितारों की है,
व्यवस्थापन पहाड़ियों का है।

वेशभूषा आकल्पन, व निर्माण किया है वर्तमान ऋतु ने।

ध्वनि संचालन पल पल परिवर्तित समय का है।

झील, तैरती नावों और एक टापू ने किया है जीवंत अभिनय।

नाट्यांतर, लेखन व निर्देशन प्रकृति का किया हुआ है।

यह नाट्य प्रस्तुति एक संपूर्ण ईश्वरीय आयोजन है,
जिसके साक्षी बने हैं हम बहिर्रंग की सीढ़ियों पर बैठ।

मन में बजती हैं ऐसी प्रस्तुति पर तालियाँ,
और हृदय से आभार और वाह वाह के स्वर उभरते हैं।

#राग

Share This Post