Author: अनुराग तिवारी

सूर्यास्त का रंगमंच

कभी देखा है तुमने भारत भवन के पीछे का सूर्यास्त! दिन भर की आपाधापी के अंत के साथ होती है एक नैसर्गिक नाट्य प्रस्तुति की शुरुआत। जिसकी प्रकाश परिकल्पना है चाँद की, और संचालन शाम ने संभाला है। झील में प्रवाहित लहरों ने दिया है जिसका कर्णप्रिय संगीत। गायन वृंद को अपने मधुर कलरव से सजाया है पक्षियों ने। नृत्य संरचना पेड़ों की है, और संचालन किया है हवाओं ने। मंच सज्जा चमकीले सितारों की है, व्यवस्थापन प...