Author: कुश वैष्णव

फटा पोस्टर निकला हीरो..

फटा पोस्टर निकला हीरो.. फिल्म हीरो हीरालाल का ये डायलोग आज भी हम तब इस्तेमाल कर लेते है जब कोई धमाकेदार एंट्री लेता है… फिल्मो के कुछ डाय्लोग्स कालजयी हो जाते है.. सबसे कॉमन में शोले का डायलोग आता है.. जब भी कही दो चार लोग चुप बैठे है तो कोई आकर कहेगा “इतना सन्नाटा क्यू है भाई?” या फिर दिवार फिल्म की तर्ज पर.. तुम्हारे पास क्या है पर ये कहना कि मेरे पास माँ है .. इसी डायलोग को फि...

प्यार को प्यार ही रहने दो.. कोई नाम ना दो…

उसका ये कहना कि गुलज़ार ने जो लिखा है उसके बाद प्यार का डेफिनेशन ही ख़त्म हो जाता है.. मुझे ठीक तभी याद आता है खामोशी का वो गीत.. हमने देखी है उन आँखों की महकती खुशबू..  वो कहती है.. तुम खुद ही देखो ना.. क्या खूब कहा है.. सिर्फ एहसास है ये रूह से महसूस करो.. प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम ना दो.. सच है इस के बाद प्यार को कोई और क्या कहेगा.. इश्क में डूबा हुआ इंसान माशूक से ज्यादा गानों से प्यार ...

पिछले सन्डे ही तो पहला पिम्पल फूटा है..

पतले चक्कों वाली सायकिल पर पैंडल मारते मारते शहर के दुसरे कोने में आ गए.. अब बस्ते रख दिए है पेड़ से सटाकर.. और मोजो को जूतों में खिसका दिया है.. कोहनी का तकिया बनाकर. लेट गए है मिट्टी में और देखते हुए आसमान में मुस्कुराकर कहते है.. कि साला पी टी आई जो पकड़ लेता तो धुनाई बहुत होती.. कुछ देर सुस्ताकर खोलते है टिफिन मेथी के परांठो की खुशबू लुटा देते है आसमानों में.. अब एक टांग पे टांग टिकाये गिनते ह...