Author: Divyanshu Rathore

तुम बस बैठी रहना

तुम बस बैठी रहना, बिल्कुल ऐसे ही, बस बैठी रहना, मैं तुम्हारी आँखों में देखूंगा, तुम्हारी आँखों में अपनी हँसी देखूंगा, तुम मेरी आँखों में तुम्हारी खुशी देखना, तुम बस बैठी रहना, बिल्कुल ऐसे ही, बस बैठी रहना। . मैं तुम्हारी आँखों में उस डूबते हुए सूरज का प्रतिबिम्ब देखूंगा, कुछ देर तुम्हारी आँखों में उस सूरज की लालिमा देखूंगा, तब तक तुम मेरी आँखों में देखना, तुम मेरी आँखों में वो ढलती हुई शाम देखना, ...