POETRY

मौन में बात

By November 24, 2017 November 27th, 2017 No Comments

आवाज़ों में से संवाद चुराकर
कह देना अपना मौन
चुप्पी का एकालाप मत बुनना
मेरे लिए

मौन की अपनी एक भाषा है
दो दिलों के बीच में
जब निःशब्द होता है
तब प्रेम होता है
मौन

पक्षियों की देह और फरों के बीच
जब दबा होता है
तब उड़ान होता है
मौन

भीतर से ही, दबे हुए..
आकाश छू लेने का सपना देख लेता है
जब मैं नज़रे उठता हूँ
आसमान की ओर
तब रंगीन बादल होता है
मौन

जब तुम मुझे सुनना चाहो
तो मेरे मौन को सुन लेना
अक़्सर
मेरी आवाज़ होता है
मौन

– धर्मेन्द्र अहिरवार

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