POETRY

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को

By July 30, 2018 No Comments

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को
मैं देखता रहा दरिया तिरी रवानी को

सियाह रात ने बेहाल कर दिया मुझ को
कि तूल दे नहीं पाया किसी कहानी को

बजाए मेरे किसी और का तक़र्रुर हो
क़ुबूल जो करे ख़्वाबों की पासबानी को

अमाँ की जा मुझे ऐ शहर तू ने दी तो है
भुला न पाऊँगा सहरा की बे-करानी को

जो चाहता है कि इक़बाल हो सिवा तेरा
तो सब में बाँट बराबर से शादमानी को

– शहरयार (अख़लाक़ मोहम्मद ख़ान)

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